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किडनी रैकेट: ₹9.5 लाख में खरीदी, ₹90 लाख में बेची; 10 लोग हिरासत मे- जिनमें एक डॉक्टर दंपत्ति भी शामिल,और 50 से ज़्यादा अस्पताल जांच के दायरे में

On: March 31, 2026 5:10 AM
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कानपुर में किडनी रैकेट मामले में जिन तीन प्राइवेट अस्पतालों का नाम सामने आ रहा है, उनमें से एक के पास रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। पूरा अस्पताल ही अवैध तरीके से संचालित हो रहा है। इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य विभाग को तब हुई जब मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पुलिस की टीम के साथ निरीक्षण करने पहुंची। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मामले में 50 से ज्यादा अस्पताल रडार पर हैं जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त रूप से देर रात तक जांच में जुटी रही।

सोमवार को, पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग के ACMO डॉ. रामित रस्तोगी—कल्याणपुर CHC के प्रभारी डॉ. राजेश सिंह और टीम के अन्य अधिकारियों के साथ—ने इस मामले से जुड़े तीन अस्पतालों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले के संबंध में कई वरिष्ठ डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा सकती है; खास बात यह है कि इनमें से कुछ डॉक्टर बड़े चिकित्सा संस्थानों से जुड़े हुए हैं। ACMO ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस, दोनों ही उन डॉक्टरों की सक्रियता से तलाश कर रहे हैं जो सर्जन या नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) के तौर पर विशेषज्ञता रखते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में फंसे अस्पतालों में छोटी-मोटी सर्जरी करने के लिए ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए, ये अस्पताल बाहर से डॉक्टरों को बुलाने पर निर्भर रहते हैं। चिकित्सा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन बाहरी डॉक्टरों से भी पूछताछ की जाएगी।

22 साल पहले भी सामने आया था किडनी तस्करी का ऐसा ही एक मामला
शहर में 22 साल पहले भी किडनी की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा एक मामला सामने आया था। उस घटना ने एक पॉश इलाके में स्थित नर्सिंग होम और वहां कार्यरत एक सर्जन की संलिप्तता को उजागर किया था। आरोप था कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमज़ोर मरीज़ों—या अन्य बीमारियों का इलाज कराने आए लोगों—को निशाना बनाता था, और उनके नियमित जांच परीक्षणों के साथ-साथ उनकी किडनी की भी जांच करता था। यदि किसी मरीज़ की किडनी, ज़रूरतमंद प्राप्तकर्ता (recipient) से मेल खा जाती थी, तो उसे सर्जरी करके निकाल लिया जाता था और ट्रांसप्लांट कर दिया जाता था। उस मामले के संबंध में एक FIR दर्ज की गई थी, जिसकी बाद में CBCID द्वारा जांच की गई थी। उस पुराने मामले में आरोपी सर्जन आज भी चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय है।

दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से आते थे डॉक्टर
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए लखनऊ, मुंबई और दिल्ली के विशेषज्ञों को नियमित रूप से बुलाया जाता था। ट्रांसप्लांट टीमों में आमतौर पर नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजिस्ट और ग्राफ्टिंग विशेषज्ञ शामिल होते थे। इसके अलावा, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट (बेहोशी के विशेषज्ञ) और डाइटीशियन भी इन टीमों के अभिन्न सदस्य होते थे।

फिलहाल पूछताछ जारी
किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के संबंध में, पुलिस ने सोमवार शाम को जानकारी जुटाने के लिए डॉ. इंद्रजीत सिंह (पांडुनगर निवासी), उनके भाई सुरजीत सिंह आहूजा, सुरजीत की पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा और एक अन्य युवक से पूछताछ की। बताया जाता है कि आहूजा अस्पताल डॉ. इंदरजीत और उनके परिवार के स्वामित्व में है।

दो महीने पहले बंद हो चुके हॉस्पिटल में भर्ती था डोनर
पुलिस को आवास विकास स्थित आरोही हॉस्पिटल में किडनी डोनर भर्ती मिला है। यह हॉस्पिटल करीब दो माह पहले बंद हो चुका है। सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मरीज को हॉस्पिटल के संचालक राजेश के कहने पर भर्ती कराया गया था। पुलिस को मौके से मरीज के नाम का हॉस्पिटल वाला पर्चा मिला है। किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने किडनी डोनेट करने वाले और ट्रांसप्लांट कराने वाले की सेहत को देखते हुए उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। देर शाम को एंबुलेंस से पुलिस सुरक्षा में दोनों को अस्पताल भेजा गया था।

छापे के डर से निजी अस्पतालों ने लाइटें की बंद
किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होते ही पुलिस ने इलाके के कई अस्पतालों में दबिश दी। इससे कल्याणपुर में संचालित हो रहे वैध-अवैध अस्पताल के संचालकों में खलबली मच गई। अधिकतर ने बाहर लगे ग्लो साइन बोर्ड से लेकर खिड़कियों तक की लाइटें बंद कर दीं। दूर से देखने में लग रहा था कि अस्पताल में कोई मरीज भर्ती ही नहीं है। तीमारदारों को बाहर निकलने से भी रोका गया था।

कल्याणपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने का मामला प्रकाश में आया है। यहां के एक अस्पताल में उत्तराखंड के युवक से करीब दस लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा हुआ। किडनी निकलवाने के बाद दलाल ने उसे जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया। अवैध तरीके से की गई किडनी की इस खरीद-फरोख्त का सुराग लगने पर सोमवार को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अस्पतालों में छापा मारा। पुलिस ने दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत दस लोगों को हिरासत में लिया है। एक अस्पताल का संबंध आईएमए के एक बड़े पदाधिकारी से बताया जा रहा है।

युवक को छह लाख रुपये नकद और 3.5 लाख का चेक दिया
कल्याणपुर के आवास विकास तीन निवासी शिवम अग्रवाल पर आरोप है कि उसने उत्तराखंड के युवक को दस लाख में किडनी बेचने का ऑफर दिया था। बताया था कि उसके रिश्तेदार को किडनी की जरूरत है। रुपयों की जरूरत के चलते युवक ने हामी भर दी। रावतपुर स्थित एक अस्पताल में किडनी निकाली गई। दलाल शिवम ने इसी अस्पताल में भर्ती मुजफ्फरनगर की महिला मरीज (35) के परिजन को 90 लाख रुपये से अधिक में किडनी बेच दी। सूत्रों के मुताबिक किडनी बेचने वाले युवक को छह लाख रुपये नकद और 3.5 लाख का चेक दिया। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद दोनों मरीजों को 24 घंटे तक इसी अस्पताल में रखा गया। इसके बाद दोनों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया।

तीन अस्पतालों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का छापा
किडनी रैकेट की जांच कर रही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार रात तीन अस्पतालों में छापा मारा। इनमें कल्याणपुर आवास विकास एक नंबर स्थित प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, पनकी कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं। टीम ने किडनी संबंधी रोगों के भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी जुटाई। छापे की इस कार्रवाई को किडनी रैकेट से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इसमें से कुछ अस्पताल किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में शामिल हो सकते हैं। कोई भी पुलिस अधिकारी खुलकर आरोपियों की गिरफ्तारी या भूमिका के बारे में बोलने से बच रहे हैं।

50 हजार रुपये न मिलने पर की पुलिस से शिकायत
सूत्रों के अनुसार दस लाख में सौदा तय होने के बाद डोनर को सिर्फ 9.5 लाख रुपये दलाल शिवम ने दिए थे। 50 हजार के लिए शिवम उसे टरका रहा था। इसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस से की। पुलिस ने जांच की तो किडनी रैकेट की परतें खुलती चली गईं। देर रात क्राइम ब्रांच ने युवक के बताए दोनों अस्पतालों में छापा मारा। जांच में वहां उसके भर्ती हाेने के सबूत मिले हैं। क्राइम ब्रांच ने दोनों हॉस्पिटल के संचालक, डॉक्टर दंपती और दलाल शिवम को हिरासत में लिया। वहीं, किडनी लेने वाली मरीज को भी आवास विकास के एक अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया था। पुलिस ने उस हॉस्पिटल में भी जांच की। वहां से पांच अन्य लोगों को उठाकर पूछताछ की जा रही है।

Sumit Chaudhary

Sumit Chaudhary एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों, खेल और राजनीति पर गहन विश्लेषण करने का अनुभव है।

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