कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव के संबंध में एक सवाल उठाया। गौरव गोगोई ने पूछा कि क्या सरकार ने पिछले पाँच वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ नफ़रत भरे भाषण, नस्लीय टिप्पणियों, उत्पीड़न और भेदभाव से जुड़ी घटनाओं का संज्ञान लिया है? क्या सरकार ऐसे मामलों में मिली शिकायतों, दर्ज FIRs, जाँच किए गए मामलों और की गई कार्रवाई से संबंधित डेटा रखती है? यदि हाँ, तो इसका वर्ष-वार और राज्य-वार विवरण क्या है?
इसके अलावा, ऐसी घटनाओं को रोकने, मामलों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करने और पीड़ितों को सुरक्षा व न्याय दिलाने के लिए कौन से विशिष्ट कदम उठाए गए हैं? साथ ही, क्या सरकार नस्लीय भेदभाव से निपटने और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों के सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा कानूनी, संस्थागत या जागरूकता तंत्रों को मज़बूत करने का प्रस्ताव रखती है?
इन सवालों के जवाब में, गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, पंजीकरण, जाँच और अभियोजन की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त डेटा के आधार पर ‘क्राइम इन इंडिया’ रिपोर्ट प्रकाशित करता है; यह डेटा वर्ष 2023 तक उपलब्ध है। पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ नफ़रत भरे भाषण, नस्लीय टिप्पणियों, उत्पीड़न और भेदभाव से संबंधित विशिष्ट डेटा केंद्रीय स्तर पर अलग से नहीं रखा जाता है। हालाँकि, मौजूदा कानूनों के तहत नफ़रत भरी टिप्पणियों, हाव-भाव और नस्लीय कृत्यों के खिलाफ कार्रवाई करने के प्रावधान मौजूद हैं।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार का काम
मंत्री ने बताया कि सरकार ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे:
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी करने का काम.
- शिकायतों के समाधान हेतु नोडल अधिकारियों की नियुक्ति.
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संवेदनशील बनाना.
- दिल्ली पुलिस में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए विशेष पुलिस इकाई (SPUNER) की स्थापना.
- शिकायत दर्ज कराने के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी शुरू करना.
सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, प्रशासकों और पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने राज्यों में पुलिस कर्मियों को इस मामले के प्रति संवेदनशील बनाएं।












