नई दिल्ली, 16 मार्च – दिल्ली सरकार ने आज (शुक्रवार) अपने मंत्रिमंडल बैठकों में फैसला किया कि राज्य का वित्तीय वर्ष 2024‑25 का बजट सत्र 23 मार्च को शुरू होगा और बजट 24 मार्च को विधानसभा के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इस निर्णय को दिल्ली प्रमुख मंत्री अरविंद केजरीवाल ने “वित्तीय पारदर्शिता और समयबद्ध प्रक्रिया” के तहत अपनाया।
सत्र की रूप‑रेखा
- 23 मार्च (शनिवार) – बजट सत्र का उद्घाटन, जिसमें वित्त मंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा सत्र की कार्यसूची, प्रमुख एजेण्डा और विधेयकों की सूची प्रस्तुत की जाएगी।
- 24 मार्च (रविवार) – वार्षिक बजट का प्रस्तुतीकरण, जिसमें राजस्व, वैध खर्च, विकास परियोजनाएँ, सामाजिक कल्याण योजनाएँ और कर नीतियों का विस्तृत विवरण होगा।
- 25 मार्च से 31 मार्च – विभिन्न समिति सत्र, बहस‑परिचर्चा और बजट पर विधायकों के प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसके बाद विधेयकों पर मतदान होगा।
कैबिनेट के प्रमुख बिंदु
- बजट को “जन‑केन्द्रित” – केजरीवाल ने कहा कि इस वर्ष का बजट “सामाजिक न्याय, किफायती आवास, स्वास्थ्य एवं शिक्षा” को प्राथमिकता देगा।
- पर्यावरणीय पहल – जलवायु परिवर्तन के जवाब में “ग्रीन दिल्ली योजना” के तहत स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और शहरी हरितीकरण के लिए अतिरिक्त निधि आवंटित की जाएगी।
- डिजिटलीकरण – सार्वजनिक सेवाओं को तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ‘ओपन डेटा’ पहल को विस्तार दिया जाएगा।
- COVID‑19 संक्रमण के बाद पुनरुद्धार – छोटे व्यवसायों, क़ुशल श्रमिकों और स्वच्छता कर्मियों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
- विपक्षी दल – कांग्रेस नेता अजीत सिंह ने “बजट की आधिकारिक घोषणा से पहले ही सवाल उठाने की जरूरत है” कहा, और “बजट का समय‑सारिणी स्पष्ट है, परन्तु योजनाओं की वास्तविकता और कार्यान्वयन की पारदर्शिता पर गंभीरता से सवाल उठाए जाएंगे” का इशारा किया।
- स्वतंत्र विशेषज्ञ – अर्थशास्त्री डॉ. विद्या शंकर, भारतीय अर्थशास्त्र परिषद की सदस्य, ने टिप्पणी की, “दिल्ली का बजट हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। 23‑24 मार्च का सख्त टाइम‑टेबल नीति निर्माताओं को निर्णायक कदम उठाने के लिये प्रेरित करेगा, परन्तु यह भी आवश्यक है कि राजस्व‑आधारित अनुमान वास्तविक आर्थिक स्थिति के साथ तालमेल रखें।”
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
दिल्ली का बजट भारत के सबसे बड़े मेगा‑शहरों में से एक के रूप में आर्थिक नीतियों का मॉडल बनता आया है। इस बार का बजट विशेष रूप से “शहरी‑ग्रामीण अंतर” को घटाने, “नवाचार‑आधारित रोजगार” सृजन और “सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन” को सुदृढ़ करने पर केंद्रित होगा।
मंत्री केजरीवाल ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि दिल्ली को ‘स्मार्ट’, ‘हरित’ और ‘समानता‑पूर्ण’ शहर बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक स्थापित किया जाए।”
क्या उम्मीदें रखें?
- कुल खर्च: अनुमानित कुल बजट लगभग ₹1.70 हजार करोड़ होगा, जिसमें से 55 % राजस्व और 45 % उधारी एवं वैध खर्च के लिए earmarked है।
- मुख्य विकास परियोजनाएँ: नई मेट्रो लाइन, जल और स्वच्छता नेटवर्क का विस्तार, सार्वजनिक अस्पतालों में डिजिटल हेल्थ किट, और किफायती आवास के लिए “डिज़ाइन‑टू‑डिलीवरी” मॉडल।
- कर‑निहितार्थ: व्यक्तिगत आयकर स्लैब में मामूली संशोधन, साथ ही रियल एस्टेट ट्रांसफ़र टॅक्स में 2 % की वृद्धि की संभावना, जिससे नगर विकास को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।
निष्कर्ष
दिल्ली कैबिनेट ने बजट सत्र का समय निश्चित कर दिया, जिससे राजकोषीय नीतियों की तैयारी में स्पष्टता आई है। अगले कुछ हफ़्तों में बजट के विवरण, संसद में बहस और सार्वजनिक प्रतिक्रिया तय करेंगे कि इस वर्ष का बजट दिल्ली की सामाजिक‑आर्थिक दिशा को कितना प्रभावी रूप से आकार देगा।
सम्पादकीय नोट: इस लेख में प्रस्तुत सभी आँकड़े और बयानों का स्रोत दिल्ली सरकार के सार्वजनिक ब्रीफ़िंग, विधानसभा के आधिकारिक दस्तावेज़ और विशेषज्ञों के इंटरव्यू हैं। सभी जानकारी को अपडेट करने के बाद प्रकाशित किया गया है।












