मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। भारतीय जनता पार्टी की जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ता पिछले 36 घंटे से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे जेडीयू और बीजेपी के बीच तनाव बढ़ गया है। जेडीयू नेताओं का आरोप है कि बीजेपी ने जनादेश का अपमान किया है। आज उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की फोटो पर कालिख भी पोत दी। इन सबके बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू के विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और सांसदों की मीटिंग बुलाई है। सभी को शाम 5 बजे सीएम हाउस आने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे।
इस बीच, नई सरकार की रूपरेखा फाइनल हो गई है। सूत्र बताते हैं कि रामनवमी तक पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई मीटिंग में लगभग सब कुछ साफ हो गया है। कुछ बातें पक्की नहीं हो पाईं, जिन पर बातचीत चल रही है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और गृह मंत्री अमित शाह एक ही प्लेन से दिल्ली गए। इस मीटिंग में अमित शाह ने कुछ बातें साफ कीं।
BJP और जेडीयू से बराबर-बराबर मंत्री बनाने की चर्चा
बुधवार को बीजेपी और जेडीयू लीडरशिप के बीच हुई बातचीत से पता चला है कि दोनों पार्टियों से बराबर-बराबर मंत्री बनाए जाएंगे। 89 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होंगे। इस बीच, जेडीयू के सीनियर नेता दो डिप्टी चीफ मिनिस्टर और गृह विभाग अपने पास रखना चाहते हैं। कई सालों तक गृह विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ही था। सूत्र बताते हैं कि डिप्टी चीफ मिनिस्टर पद के लिए निशांत कुमार सबसे आगे हैं, उनके बाद विजय चौधरी हैं। विजय चौधरी सीएम नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में से एक हैं। इन दोनों के नाम पर पार्टी में किसी को कोई एतराज नहीं है। हालांकि निशांत कुमार नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन जेडीयू के सीनियर नेताओं ने उन्हें मना लिया।
चिराग, उपेंद्र और मांझी की पार्टियों से कितने मंत्री होंगे?
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी सरकार में 26 मंत्रियों ने शपथ ली। इसमें बीजेपी से 14, जेडीयू से 8, एलजेपी (राम) से दो और हम और आरएलएसपी से एक-एक मंत्री शामिल थे। सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा नॉमिनेशन के बाद, मौजूदा ब्लूप्रिंट में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 33 हो सकती है। जेडीयू और बीजेपी के पास बराबर संख्या में मंत्री होंगे, 14-14। चिराग की पार्टी से तीन मंत्री हो सकते हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टियों से पहले की तरह एक-एक मंत्री होने की उम्मीद है।
विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा?
विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी।
मुख्यमंत्री पद पर फिर चौंका सकती है भाजपा
सबसे अधिक सवाल मुख्यमंत्री कौन बनेगा? यह ही पूछे जा रहे हैं। भाजपा के नेताओं को यह भी लग रहा है कि कोई चौंकाने वाला नाम अचानक सीएम के रूप में न सामने आ जाए। नितिन नवीन को जब भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था, तब यह कहा गया कि उन्हें दिल्ली में रखकर कुछ समय तक तैयार किया जाएगा और फिर बिहार का सीएम बनाया जाएगा। अचानक मुख्यमंत्री बदलने की बात आने से पहले ही इस चर्चा पर विराम लग गया, क्योंकि नितिन को विधानसभा से इस्तीफा दिलाने की तैयारी के तहत राज्यसभा के लिए उनका नाम जारी कर दिया गया। अब भाजपा फिर कुछ नया दांव भी खेल ले तो अजूबा नहीं होगा। बिहार चुनाव हो चुका है। चुनाव अब लगभग पांच साल बाद होना है। ऐसे में प्रयोग के लिए किसी नए चेहरे को सीएम बनाने पर भी कोई अंतर नहीं पड़ना है। भाजपा ऐसा करती रही है, इसलिए खुलकर प्रदेश के नेता कुछ नहीं बोल रहे हैं। यही कारण है कि संजीव चौरसिया का भी नाम उछल रहा है। इसके अलावा सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय के नाम की चर्चा की भी खूब हो रही है। हालांकि, इन तीनों में सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। कारण है कि कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा- यह कहा गया था। भाजपा ने चुनावों में उसका असर देखा है। इसलिए, उनकी संभावना बनी हुई भी है और नहीं भी।











