पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक जारी रहने पर भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, पेट्रोलियम एवं उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई पर भी जोखिम बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, इन जोखिमों के बीच कच्चे तेल का बड़ा आयातक होने के बावजूद भारत पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, कम चालू खाते का घाटा और नियंत्रित महंगाई के कारण बढ़ती वैश्विक कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने में सक्षम है।
लेकिन, अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका रुपये के एक्सचेंज रेट, करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई पर बुरा असर पड़ सकता है। फर्टिलाइजर और पेट्रोकेमिकल्स जैसे सेक्टर, जो लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कच्चे तेल पर निर्भर हैं, उन पर भी असर पड़ सकता है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने अपने फरवरी इकोनॉमिक सर्वे में कहा कि सेफ जगहों पर कैपिटल फ्लो से करेंसी पर और दबाव पड़ेगा।

वित्त मंत्रालय का रिपोर्ट
वित्त मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा, ईरान पर हमलों के बाद बढ़े तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है। इस व्यवधान के बीच वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद बाहरी क्षेत्र स्थिर बना हुआ है। साथ ही, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों समेत सक्रिय व्यापार कूटनीति से निर्यात गंतव्यों का विविधीकरण एवं मध्यम अवधि में बाह्य मजबूती बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता और पशि्चम एशिया संकट के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। इस अवधि में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रह सकती है, जबकि वास्तविक सकल मूल्यवर्धन वृद्धि 7.7 फीसदी रहने का अनुमान है। जनवरी, 2026 में आर्थिक गतिविधियां व्यापक आधार पर मजबूत रहीं, जिन्हें लॉजिस्टिक गतिविधि, पीएमआई में विस्तार और मजबूत मांग जैसे उच्च आवृत्ति संकेतकों का समर्थन मिला।





