केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का बयान: रूस से कच्चे तेल की खरीद पर कोई रोक नहीं, आपूर्ति में बाधा आने पर वैश्विक बाजार को गंभीर परिणाम, भारतीय कंपनियों को अवसर।
मुंबई: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि रूस से कच्चे तेल की खरीद पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने चेताया कि अगर इस आपूर्ति में कोई बाधा आती है तो दुनिया को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
पुरी ने ईरान और वेनेजुएला के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन किया है और वैश्विक जिम्मेदारी निभाई है।
रूस के तेल पर वैश्विक निर्भरता
पुरी ने कहा कि रूस हर दिन करीब एक करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है और यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। उन्होंने कहा,
“ऊर्जा एक ऐसी चीज है जिसके बिना आप नहीं रह सकते… अगर आप दूसरे सबसे बड़े उत्पादक को हटा देंगे तो खपत में कटौती करनी होगी। इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।”
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और मूल्य नीति
पुरी ने बताया कि रूस से तेल खरीद की मूल्य सीमाएं तय की गई हैं, और भारत समय-समय पर कम कीमतों पर तेल खरीदने का अनुरोध करता है। उन्होंने कहा कि तुर्की, जापान और यूरोपीय संघ समेत कई देश रूस से तेल खरीदते हैं।
मंत्री ने कहा कि इस समय रूस द्वारा दी जा रही छूट बहुत अधिक नहीं है और वैश्विक बाजार में तेल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी कच्चे तेल की कीमत 65-68 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहेगी।
अमेरिकी नीति और शेल गैस का असर
पुरी ने कहा कि अमेरिका शेल गैस पर जोर देने वाले प्रमुख उत्पादक देश के रूप में यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जीवाश्म ईंधन की कीमतें अधिक गिरें नहीं। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति और घरेलू राजनीतिक माहौल के कारण अमेरिका के लिए कीमतें स्थिर रखना आवश्यक है।
भारतीय कंपनियों की स्वतंत्रता
पुरी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां स्वतंत्र रूप से तय करती हैं कि वे रिफाइनिंग के लिए किस स्रोत से कच्चा तेल खरीदेंगी। इन कंपनियों के पास पेशेवर प्रबंधन और निदेशक मंडल मौजूद हैं, जो यह निर्णय सुनिश्चित करते हैं।











