सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात के लिए नया नियम लागू किया। अब हर टन के निर्यात पर 8 रुपये का शुल्क और अनुबंध का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
Business Desk: भारतीय सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात को लेकर नया नियम लागू किया है। अब इस अनाज के निर्यात के लिए कॉन्ट्रैक्ट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और हर टन के निर्यात पर 8 रुपये का शुल्क देना होगा।
नया नियम और उद्देश्य
इस कदम का उद्देश्य भारतीय चावल को ‘इंडिया ब्रांड’ के रूप में वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। पहले जब विदेशों में स्थानीय आयातक भारतीय चावल को पैक करते थे, तो इसकी भारतीय पहचान कम हो जाती थी। अब यह शुल्क और रजिस्ट्रेशन व्यवस्था ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में मदद करेगी।
इंडस्ट्री का रुख
बासमती चावल पर फीस बढ़ाने को लेकर पहले मतभेद थे, लेकिन गैर-बासमती चावल के तीन प्रमुख निर्यातक संघों ने समर्थन किया है।
- राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि यह निर्णय सभी स्टेकहोल्डर्स की सहमति से लिया गया है।
- इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने कहा कि इससे निर्यात प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता आएगी।
फायदा और असर
- किसी भी शिपमेंट से पहले एपीडा (APEDA) के साथ अनुबंध का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
- सरकार को निर्यात पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा और नीति में एकरूपता और पारदर्शिता आएगी।
- व्यापार पर तत्काल बड़ा असर नहीं होगा, केवल निर्यातकों की लागत थोड़ी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। यह नया नियम बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात में संतुलन बनाने में मदद करेगा।











