नेशनल डेस्क: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने उन्हें देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण का सूत्रधार बताते हुए उनकी विनम्रता और ईमानदारी को प्रेरणा का स्रोत कहा।
📌 राहुल गांधी की श्रद्धांजलि
राहुल गांधी ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट किया –
“भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की जयंती पर उन्हें मेरा सादर नमन। राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी अटूट निष्ठा, गरीबों और वंचितों के लिए उनके साहसिक निर्णय, और मज़बूत अर्थव्यवस्था के निर्माण में उनका ऐतिहासिक योगदान हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनकी सादगी, विनम्रता और ईमानदारी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”
📌 मल्लिकार्जुन खरगे की भावनाएं
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने लिखा –
“हम राष्ट्र निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को याद करते हैं। वे भारत के आर्थिक परिवर्तन के सूत्रधार थे। उनकी विनम्रता, बुद्धिमत्ता और गरिमापूर्ण व्यवहार ने उन्हें सबके लिए आदर्श बनाया। उनके आर्थिक सुधारों ने अवसरों के नए द्वार खोले, एक समृद्ध मध्यम वर्ग तैयार किया और लाखों परिवारों को गरीबी से बाहर निकाला।”
खरगे ने कहा कि सिंह निष्पक्षता और समावेशिता में गहराई से विश्वास करते थे। उनके नेतृत्व ने दिखाया कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी न केवल संभव है बल्कि शक्तिशाली भी है।
📌 प्रियंका गांधी की श्रद्धांजलि
प्रियंका गांधी वाद्रा ने लिखा –
“अपनी दूरदर्शिता से डॉ. मनमोहन सिंह जी ने देश को असाधारण प्रगति के रास्ते पर अग्रसर किया। एक समावेशी आर्थिक मजबूती के जरिये गरीब, दलित और वंचित वर्गों को भी समृद्ध किया। उनकी सादगी, मेहनत, ईमानदारी और देश के प्रति अटूट समर्पण हम सबके लिए प्रेरणा है।”
📌 मनमोहन सिंह का जीवन और योगदान
- जन्म: 26 सितंबर 1932, पंजाब के गाह गांव (अब पाकिस्तान)
- निधन: 26 दिसंबर 2024
- प्रधानमंत्री कार्यकाल: 2004 से 2014
- उपलब्धियां:
- आर्थिक सुधारों और उदारीकरण की नीतियों के सूत्रधार
- भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था की राह पर अग्रसर किया
- वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई
👉 डॉ. मनमोहन सिंह को आज भी उनकी ईमानदारी, सादगी और दूरदर्शिता के लिए याद किया जाता है। उनकी विरासत भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनी रहेगी।






