कोलकाता हाईकोर्ट ने सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी समेत छह सदस्यों को भारत वापस लाने का आदेश दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार के निर्वासन फैसले पर अस्थायी रोक के आवेदन को खारिज किया।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की रहने वाली सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी तथा उनके परिवारों को अवैध प्रवासी बताकर बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को कोलकाता हाईकोर्ट ने पलट दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से निर्देश दिया कि निर्वासित किए गए सभी छह लोगों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए।
कोर्ट ने केंद्र सरकार के अस्थायी रोक लगाने के आवेदन को भी खारिज कर दिया। यह आदेश जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतोब्रोतो कुमार मित्रा की बेंच ने भोदू शेख द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus petition) की सुनवाई के दौरान दिया।
याचिका कब दायर की गई थी?
भोदू शेख ने 26 जून 2025 को हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया कि उनकी 26 वर्षीय बेटी सोनाली, जो नौ महीने की गर्भवती हैं, उनके पति दानेश शेख और पांच साल के बेटे को दिल्ली में हिरासत में लिया गया और फिर बांग्लादेश भेज दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता अमीर खान ने भी अपनी बहन स्वीटी बीबी और उनके दो बच्चों के बांग्लादेश भेजे जाने की बात दर्ज की।
परिवार की नागरिकता और सुरक्षा चिंता
याचिकाओं में कहा गया कि परिवार दो दशक से दिल्ली के रोहिणी इलाके में रह रहा था और अपनी मेहनत से गुजारा कर रहा था। 18 जून को एएन काटजू मार्ग पुलिस ने इन परिवारों को बांग्लादेशी होने के शक में हिरासत में लिया और 27 जून को कई सदस्यों को बांग्लादेश भेज दिया गया, जहां उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
परिवार को इस बात की भी चिंता है कि अगर सोनाली बांग्लादेश में बच्चे को जन्म देती हैं, तो बच्चे की नागरिकता क्या होगी। हाईकोर्ट का आदेश परिवार के लिए राहत और सुरक्षा का संकेत माना जा रहा है।











