कर्नाटक के महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज, कलबुर्गी (एमआरएमसी) में छात्रवृत्ति घोटाला, किसी दूसरे व्यक्ति ने नहीं, बल्कि खुद संस्थान के अध्यक्ष ने ही अंजाम दिया था। बैंक में जमा छात्रों के वजीफे की राशि में से 33 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर दी। बाद में अध्यक्ष ने अपने बेट राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर अचल संपत्तियां खरीद ली। अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मंगलौर उप क्षेत्रीय कार्यालय ने विशेष न्यायालय में भीमाशंकर बिलगुंडी और मल्लाना एस मद्दारकी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अभियोग दायर किया है। यह अभियोग महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज, कलबुर्गी (एमआरएमसी) में 2018 से 2024 के बीच आरोपियों द्वारा किए गए छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित है।
ईडी का जांच में क्या आया सामने?
ईडी ने कर्नाटक के कलबुर्गी शहर केंद्रीय अपराध पुलिस स्टेशन द्वारा आईपीसी की विभिन्न धाराओं 1860 के तहत डॉ. एस एम पाटिल, केनरा बैंक के प्रबंधक सुभाष और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की है। मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी (हैदराबाद एजुकेशन सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष, जो एमआरएमसी का प्रबंधन करती है, ने लेखा विभाग के कर्मचारियों और मल्लाना एस मद्दारकी (कार्यालय अधीक्षक) की सहायता से, 2018 और 2024 के बीच की अवधि में, एमआरएमसी के पीजी मेडिकल छात्रों के बैंक खातों में जमा छात्रवृत्ति राशि में से 33,34,78,691 रुपये की हेराफेरी की।
उन्होंने प्रवेश के समय छात्रों से खाली हस्ताक्षरित चेक एकत्र किए। उन चेकों में विवरण भरकर उन्हें भुना लिया। इसके चलते छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति से वंचित कर दिया गया। इस मामले में ईडी ने अप्रैल और मई 2025 के दौरान कर्नाटक के कलबुर्गी में 9 स्थानों पर छापेमारी की थी। तलाशी अभियान के परिणामस्वरूप विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। जांच के दौरान, मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी द्वारा अपने बेटों राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर खरीदी गई अचल संपत्तियों, भीमाशंकर बिलगुंडी के कई बैंक खातों और दूसरे आरोपी मल्लन्ना एस मद्दार्की की अचल संपत्तियों के रूप में प्राप्त 6.72 करोड़ रुपये की अपराध-प्राप्त राशि को पीओ के माध्यम से अस्थायी तौर पर कुर्क किया गया है।








