बिहार चुनाव 2025 की तैयारियां तेज, निर्वाचन आयोग ने 470 पर्यवेक्षक नियुक्त किए जिनमें 320 IAS और 60 IPS शामिल। प्रशांत किशोर का BJP पर हमला, तेजस्वी का भ्रष्टाचार पर सख्त बयान, रेलवे से नई ट्रेनों की सौगात और क्षत्रिय समाज की नाराज़गी से चुनावी माहौल गरमाया।
बिहार चुनाव 2025: 320 आईएएस, 60 आईपीएस होंगे तैनात, 470 पर्यवेक्षक बनाए गए
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए 470 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इनमें 320 आईएएस, 60 आईपीएस और 90 अन्य सेवाओं के अधिकारी शामिल हैं। सभी पर्यवेक्षक 3 अक्टूबर को आयोग के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद 4 अक्टूबर को चुनाव आयोग की उच्च स्तरीय टीम दो दिवसीय दौरे पर पटना आएगी और चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेगी।
इस बीच बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप भी चरम पर हैं। प्रशांत किशोर ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दोपहर 12 बजे पटना में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। वहीं, तेज प्रताप यादव और अखिलेश यादव के बीच तल्ख़ी सामने आई है। तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान अखिलेश ने उनका कॉल रिसीव नहीं किया और न ही मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने उनका नंबर ब्लॉक कर दिया।
रेलवे की ओर से भी बिहार को बड़ी सौगात दी गई है। पटना जंक्शन से तीन अमृत भारत एक्सप्रेस और चार नई पैसेंजर ट्रेनों को रवाना किया गया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसद विवेक ठाकुर, सांसद कौशलेंद्र कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद मौजूद रहे। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि इन नई ट्रेनों से यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधा मिलेगी।
इधर, तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी हालत में अपराध और भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा— “जो गलत करेगा, उसे सजा मिलेगी। चाहे वह अपना हो या पराया, किसी जाति-धर्म से जुड़ा हो। मैं अपनी जुबान का पक्का हूं।”
दूसरी ओर, भोजपुर जिले के संदेश विधानसभा क्षेत्र में क्षत्रिय समाज ने विकास को चुनावी मुद्दा बनाने का ऐलान किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस बार उनकी पसंद का उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा, तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्षत्रिय समाज की यह नाराज़गी चुनावी समीकरणों को बदल सकती है और राजनीतिक दलों के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है।





