बागपत के विकास रावत अब तक 300 से ज्यादा सांप पकड़ चुके हैं। आटा मिल में कोबरा पकड़ते समय उन्हें डस लिया। जिला अस्पताल में 8 एंटी वेनम इंजेक्शन लगे। सरिता यादव और अक्षित भी सांप के डंसने से पीड़ित हुए।
अब तक 300 सांप पकड़ने वाले को दिखा कोबरा, दस्ताने पहनकर पकड़ने चले, लेकिन डस लिया – 8 एंटी वेनम इंजेक्शन लगे
बागपत संवाददाता
बागपत जिले के खट्टा प्रहलादपुर गांव निवासी 40 वर्षीय व्यापारी विकास रावत का सांप पकड़ना अब शौक बन चुका है। पिछले 20 सालों में वह 300 से अधिक सांप पकड़ चुके हैं। सोमवार शाम जब उन्हें अपनी आटा मिल की हौज में एक कोबरा दिखाई दिया, तो हमेशा की तरह सतर्क होकर पकड़ने का प्रयास किया। दस्ताने पहनने के बावजूद कोबरा ने उनके हाथ में डस लिया।
जिला अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें 8 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाए। फिलहाल उनकी हालत में सुधार है।
🐍 एक ही दिन में तीन लोग सांप के डंसने का शिकार
- सरिता यादव (35 वर्ष), ग्राम बालैनी – घर में सोफे के नीचे सफाई करते समय सांप ने हाथ में डस लिया। अस्पताल में उन्हें 5 इंजेक्शन दिए गए।
- अक्षित (21 वर्ष), ग्राम ट्यौढ़ी – घर पर पैर में किसी जहरीले जीव ने काटा। उसने सांप के डसने का शक जताया। अस्पताल में 2 इंजेक्शन लगाए गए।
🐍 डसने के बाद भी पकड़ा और छोड़ा कोबरा
विकास रावत को जीवों से गहरा लगाव है। उन्होंने बताया कि डसने के बाद भी उन्होंने कोबरा को पकड़ा और सुरक्षित रूप से गांव के पास नहर में छोड़ दिया। उन्होंने लोगों से अपील की – “सांप को न मारें, क्योंकि पारिस्थितिकी तंत्र में सांप की अहम भूमिका होती है।”
🐍 कैसे बना सांप पकड़ना शौक?
विकास ने करीब 20 साल पहले भूसा और उपले सप्लाई का काम शुरू किया था। इस दौरान उन्हें अक्सर सांपों का सामना करना पड़ता था। तब उन्होंने एक संपेरे से सांप पकड़ने की ट्रेनिंग ली और इसके बाद खुद ही सांप पकड़ने लगे।
अब किसी के घर, दुकान या खेत में सांप दिखने पर लोग उन्हें बुला लेते हैं। वे सांप को पकड़कर जंगल में छोड़ आते हैं।
अब तक वह 300 से ज्यादा सांप पकड़ चुके हैं और उन्हें 5–6 बार सांप डस भी चुके हैं।





