तालिबान सरकार के आदेश पर अफगानिस्तान में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह बंद। आम लोग दुनिया से कटे, कारोबार और राहत संगठनों की मुश्किलें बढ़ीं।
अफगानिस्तान में डिजिटल ब्लैकआउट: इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह ठप, आम लोग दुनिया से कटे
इंटरनेशनल डेस्क: अफगानिस्तान में सोमवार से अचानक डिजिटल ब्लैकआउट हो गया है। पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं एक साथ बंद कर दी गईं। तालिबान सरकार के इस आदेश ने करोड़ों अफगान नागरिकों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया है। राजधानी काबुल के साथ हेरात, मजार-ए-शरीफ, उरुजगान और कई प्रांतीय शहर अब पूरी तरह ऑफलाइन हो गए हैं।
कैसे बंद हुआ नेटवर्क?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट लाइनों को काटा गया। इसके बाद कुछ घंटों तक मोबाइल डेटा चालू रहा, लेकिन धीरे-धीरे मोबाइल टावर भी बंद कर दिए गए। अब न तो इंटरनेट चल रहा है और न ही फोन कॉल की जा सकती है।
तालिबान का आदेश
देश के इंटरनेट प्रदाताओं ने नोटिस जारी कर पुष्टि की है कि यह ब्लैकआउट तालिबान अधिकारियों के आदेश पर लागू किया गया। पहले भी तालिबान कुछ इलाकों में इंटरनेट बंद करता रहा है, लेकिन तब मोबाइल सेवाएं सीमित रूप से चालू रहती थीं। इस बार पहली बार इंटरनेट और मोबाइल दोनों पूरी तरह बंद कर दिए गए।
आम लोगों और कारोबार पर असर
डिजिटल ब्लैकआउट ने अफगान नागरिकों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है।
- परिवार अपने विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे।
- अंतरराष्ट्रीय कॉल और मैसेज पूरी तरह ठप हैं।
- कारोबारियों का विदेशी क्लाइंट्स और सप्लायर्स से कनेक्शन टूट गया है, जिससे व्यापार पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
राहत संगठनों की चिंता
अफगानिस्तान पहले से ही मानवीय संकट से जूझ रहा है। राहत और मानवीय सहायता संगठनों के लिए अब जमीनी हालात का आकलन करना और भी मुश्किल हो गया है।
- वे यह नहीं जान पा रहे कि किन इलाकों में तुरंत मदद की जरूरत है।
- दवाइयां और राहत सामग्री पहुंचाने में भारी बाधा खड़ी हो गई है।
क्यों लगाया गया ब्लैकआउट?
तालिबान ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन विशेषज्ञों और स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि यह कदम राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए उठाया गया।
- बड़े विरोध प्रदर्शन या जनआंदोलन को रोकने के लिए इंटरनेट बंद किया गया।
- सरकार असंतोष की खबरों और आवाज़ उठाने वालों को दबाना चाहती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की संभावना
मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तालिबान की इस कार्रवाई की आलोचना कर सकते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों के सामने यह चुनौती होगी कि बिना संपर्क और पारदर्शिता के अफगानिस्तान को कैसे मदद पहुंचाई जाए।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तालिबान की पहले से खराब छवि को और बिगाड़ देगा।











