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बिहार चुनाव 2025: पवन सिंह की बीजेपी में वापसी, कुशवाहा साथ

On: October 1, 2025 9:22 AM
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बिहार चुनाव 2025 से पहले भोजपुरी स्टार पवन सिंह की बीजेपी में घर वापसी। कुशवाहा के साथ आने से शाहाबाद क्षेत्र में एनडीए को मिल सकता है बड़ा फायदा।

बिहार चुनाव 2025: पवन सिंह की बीजेपी में घर वापसी, कुशवाहा भी साथ – क्या बदलेगा शाहाबाद का समीकरण?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए और महागठबंधन दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर मंथन तेज हो गया है। खासकर शाहाबाद क्षेत्र, जहां 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए को करारी हार का सामना करना पड़ा था, अब चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।

भोजपुरी सुपरस्टार और गायक पवन सिंह, जिन्होंने काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़कर एनडीए के समीकरण बिगाड़ दिए थे, अब एक बार फिर बीजेपी में घर वापसी कर रहे हैं। सोमवार की रात बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा ने एनडीए नेता उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की। मंगलवार को पवन सिंह ने भी उनसे भेंट की। इसके बाद बीजेपी ने स्पष्ट किया कि “पवन सिंह पार्टी में थे और पार्टी में ही रहेंगे।”

पवन सिंह की वापसी क्यों अहम है?

2024 लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने बगावत कर काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसके चलते उपेंद्र कुशवाहा तीसरे नंबर पर चले गए और एनडीए की करारी हार हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवन सिंह की लोकप्रियता भोजपुरी भाषी वोटरों में काफी असरदार है और उनका प्रभाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में है।

जातिगत समीकरण का नया खेल

शाहाबाद क्षेत्र की राजनीति जातीय समीकरणों पर आधारित मानी जाती है। 2020 विधानसभा चुनाव में इस इलाके की 22 सीटों में से एनडीए को सिर्फ 2 सीटें मिली थीं।

  • पवन सिंह राजपूत वोट बैंक को साध सकते हैं।
  • उपेंद्र कुशवाहा अपने स्वजातीय वोटर्स को साथ रख सकते हैं।
  • दोनों का गठजोड़ महागठबंधन की रणनीति को कमजोर कर सकता है।

अंदरखाने की डील

सूत्रों के अनुसार, पवन सिंह को कुशवाहा की पार्टी में दो विधानसभा सीटों और राज्यसभा का वादा किया गया है। वहीं, बक्सर में बागी आनंद मिश्रा को साधने के बाद अब बीजेपी काराकाट में पवन सिंह को भी अपने पाले में लाने में जुटी है।

क्या बदलेगा खेल?

अगर पवन सिंह और कुशवाहा एक साथ आते हैं तो राजपूत-कुशवाहा समीकरण एनडीए के पक्ष में जा सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को इस समीकरण का लाभ मिला था, लेकिन इस बार हालात उलट सकते हैं।

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