मेरठ के युवा इंजीनियर सुधांशू पाल ने टाटा नैनो से 20 सेंटीमीटर छोटी माइक्रो एंबुलेंस बनाई। बैटरी और सौर ऊर्जा से चलने वाली यह एंबुलेंस संकरी गलियों और ग्रामीण इलाकों में मरीजों तक जल्दी पहुंच सकती है।
National Desk: मेरठ के युवा इनोवेटर सुधांशू पाल ने एक अनोखी माइक्रो एंबुलेंस डिजाइन की है, जो टाटा नैनो से भी छोटी है। यह एंबुलेंस भीड़भाड़ वाले इलाकों और संकरी गलियों में आसानी से मरीज तक पहुँच सकती है। इस नई एंबुलेंस ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में खूब ध्यान खींचा।
नैनो से 20 सेंटीमीटर छोटी
यह एंबुलेंस केवल 2.9 मीटर लंबी है, यानी टाटा नैनो से लगभग 20 सेंटीमीटर छोटी। इसके बावजूद इसमें दो स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलेंडर, स्मार्ट मॉनिटर, बीपी और पल्स ऑक्सीमीटर, प्राथमिक चिकित्सा किट जैसी सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं।
बैटरी और सोलर से चलने वाली
इस माइक्रो एंबुलेंस को बैटरी और सौर ऊर्जा दोनों से चलाया जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में बिजली न होने पर यह सोलर पैनल से चार्ज होकर 40 किलोमीटर तक चल सकती है।
कीमत और वेरिएंट
- 400 किमी रेंज वाला मॉडल – 8.5 लाख रुपये
- 200 किमी रेंज वाला मॉडल – 6.5 लाख रुपये
विदेश की नौकरी छोड़कर देश सेवा
सुधांशू पाल पहले इटली की एक ऑटोमोबाइल कंपनी में लग्जरी गाड़ियों पर काम कर रहे थे। करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर उन्होंने भारत लौटकर स्वदेश सेवा और स्टार्टअप शुरू किया।
गांव और पहाड़ी इलाकों के लिए वरदान
छोटी एंबुलेंस पहाड़ी रास्तों, घनी बस्तियों और ट्रैफिक जाम वाले शहरों में मरीज तक जल्दी पहुँच सकती है। समय पर इलाज मिलने से जान बचाने में मदद होगी।
कम लागत में बेहतर सुविधा
सुधांशू के अनुसार, इस एंबुलेंस की रनिंग कॉस्ट सामान्य एंबुलेंस से काफी कम है। इसका छोटा आकार, सौर ऊर्जा आधारित तकनीक और लो-मेंटेनेंस डिज़ाइन इसे सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए किफायती बनाता है।
सुधांशू का सपना है कि यह एंबुलेंस देश के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करे और मरीजों तक समय पर मदद पहुँचाए।











