नेशनल डेस्क: लद्दाख में बुधवार को भड़की हिंसा ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया। इस झड़प में कम से कम चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई और लगभग 90 लोग घायल हुए। स्थिति पर काबू पाने के लिए लेह जिले में कर्फ्यू लगाया गया और सीआरपीएफ़, स्थानीय पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की अतिरिक्त तुकड़ियां तैनात की गई हैं।
हिंसा की पृष्ठभूमि
हिंसा लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग के लिए बुलाई गई बंदी के दौरान भड़की। हिंसक भीड़ ने बीजेपी कार्यालय और लद्दाख हिल काउंसिल सचिवालय को आग के हवाले कर दिया।
इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया और कांग्रेस पार्षद फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग पर भीड़ में शामिल होने का आरोप लगाया। पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
- लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने घटना को “साज़िश” करार दिया और हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
- गृह मंत्रालय ने पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। मंत्रालय का कहना है कि उनके उत्तेजक बयानों के कारण भीड़ ने सरकारी इमारतों पर हमला किया।
आरोपों का जवाब
सोनम वांगचुक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आंदोलन अहिंसक है। उन्होंने अनशन तोड़ने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मंगलवार को आंदोलन के दौरान 72 वर्षीय पुरुष और 62 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ गई थी, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया।
वांगचुक ने सरकार से अपील की कि उनका शांति संदेश सुना जाए और आंदोलन को शांतिपूर्ण रखा जाए।
वर्तमान स्थिति
- लेह और कारगिल जिलों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
- कर्फ्यू जारी
- सभी हिंसक गतिविधियों की जांच चल रही





